The3rone

जुलाई 16, 2008

विश्वास करना और आज्ञाकारी रहना

Filed under: Intermediate — the3rdone @ 11:45 पूर्वाह्न
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मैं बाइबल पढ़ रहा हूँ यहोशु का पुस्तक ५वा अध्याय जहां प्रभु खतना के बारे मे यहोशु को बताता है। ६ठवा पढ मे प्रभु उस को याद दिलाता है कैसे इस्राएली लोग प्रभु का आज्ञा को नही माना।इसलिए शपथ खाके बोला कि वह लोग वह भुमी नही देखोगे जो उसने उनके बाप-दादों को वादा किया था देने के लिए। यह बात मेरा मन मे स्पष्ट रिती से मै जान गया कि बाप-दादा के समय में उन लोगों ने विश्वास करके आज्ञाकारी रहा, लेकिन इस का मतलब यह नही कि उन के बच्चे के जीवन में बिना उनका विश्वास से आएगा। जैसे बाप ने विश्वास किया वैसे ही बच्चा भि करना चहिए। जैसा बाप आज्ञाकारी रहा वैसे ही बच्चा बी आज्ञाकारी रहना चाहिए। नहीं तो जो उन के पास थे वो बी ले लिया जाएगा।
अपना दिल से विश्वास करना और आज्ञाकारी रहना मेरा कर्तव्य बनता है। उसके नाम और वचन पर विश्वास करने चाहिए। उसका आज्ञा का पालन करके उसको प्रसन्न करना चाहिए, तब मेरे साथ उसका वाचा स्थापित होगा।

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1 टिप्पणी »

  1. सभी धर्म नैतिकता की शिक्षा देते हैं. बाईबिल के प्रसंगों से भी जीने की विधियां सीखी जा सकती है.

    टिप्पणी द्वारा राजेश अग्रवाल — जुलाई 20, 2008 @ 3:40 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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