The3rone

अगस्त 13, 2009

प्रभु की स्तुती हो!

Filed under: Beginners,God, Jesus, Spirit, life — the3rdone @ 6:31 अपराह्न
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जो लोग यीशु पर विश्वास करता है और उसके नाम में जमा होता है, उन के सामने मै वाचा के बारे मे बता रहा हूँ।
बाइबल के पहला पुस्तक उत्पत्ति का ६वाँ अध्याय मे लिखा है:
जब मनुष्य भूमि के ऊपर बहुत बढने लगे, … तब याहवे ने कहा, “मेरा आत्मा मनुष्य से सदा लों विवाद करता न रहेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।” याहवे ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है। और याहवे पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ। तब याहवे ने कहा, “मैं मनुष्य को जिसकी मैं ने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूँगा;…क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूँ।” परन्तु याहवे के अनुग्र्ह की दृष्टि नूह पर बनी रही।
तब परमेश्वर ने नूह से कहा, “सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे सामने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्र्व से भर गई है, इसलिए मैं उनको पृथ्वी समेत नष्ट कर डालूँगा। इसलिए तू …एक जहाज बना ले, …और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जल-प्रलय करके सब प्राणियों को, जिनमें जीवन का प्राण है, आकाश के नीचे से नष्ट करने पर हूँ; और सब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएँगे। परन्तु तेरे संग मैं वाचा बाँधता हूँ; इसलिए तू अपने पुत्रों स्त्री और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना। और सब जीवित प्राणियों में से तू एक एक जाति के दो दो, …जहाज में ले जाकर, अपने साथ जीवित रखना। …परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।
उत्पत्ति ७: १२ और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही। १७ पृथ्वी पर चालीस दिन तक जल-प्रलय होता रहा; और पानी बहुत बढ़्ता ही गया, जिससे जहाज़ ऊपर को उठने लगा; २४ और जल पृथ्वी पर एक सौ पचास दिन तक प्रबल रहा।
जब नूह ने देखा कि धरती सूख गई तब परमेश्वर ने नूह से कहा, तू…जहाज़ में से निकल आ। तब नूह ने याहवे के लिए एक वेदी बनाई; और सब शुद्ध पशुओं और सब शुद्ध पक्षियों में से कुछ कुछ लेकर वेदी पर होमबलि चढ़ाया।
फिर परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और बढ़ो और पृथ्वी में भर जाओ।…सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे;…पर मांस को प्राण समेत अर्थात लहू समेत तुम न खाना।…सुनो, मैं तुम्हारे साथ और तुम्हारे पश्चात़् जो तुम्हारा वंश होगा, उसके साथ भी वाचा बाँधता हूँ; और सब जीवित प्राणियों से भी जो तुम्हारे संग है,…अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नष्ट न होंगे: और पृथ्वी का नाश करने के लिए फिए जल-प्रलय न होगा।”

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