The3rone

सितम्बर 1, 2014

Buried

Filed under: Uncategorized — the3rdone @ 6:14 अपराह्न
Buried

In the grave

Jesus really died physically. Whilst on the cross, He also felt forsaken by God equal to a kind of spiritual death. He was taken down from the cross and buried in a tomb of another. He would not be there for long, but for three days only. The apostle Peter writes for us that Jesus went to hell for us and to preach to the spirits in prison; and to get the keys from the devil. Before He died, He foretold that He would return from death. My past is buried with Him.

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अप्रैल 7, 2009

परमेश्वर के वचन के सिद्धान्त सम्बन्धी सत्यों की नींव

Filed under: Uncategorized — the3rdone @ 7:12 पूर्वाह्न

मृत कार्यो से पश्चाताप
उद्देश्य: प्रत्येक को आधारभूत शिक्षण सत्यों से परिचित कराना। आपको इन सत्यों की पूर्ण समझ होनी चाहिए, उन्हें कंठस्थ करे और अपने जीवन पर लागू करें।

समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो।

पश्चाताप का अर्थ  – शैतान व पाप की आज्ञाकारिता से फिरना तथा यीशु व उसके वचन को नये स्वामी व प्रभु के रुप में मानना।
परिभाषा : पश्चाताप परमेश्वर के आत्मा का कार्य है हमारे भीतर। यह हमें पूर्णतया बदल देता है पाप व परमेश्वर के प्रति। पश्चाताप के द्वारा मनुष्य का हृदय परमेश्वर के लिए जागरुक होता है। पश्चाताप से पहले मनुष्य पाप से अपने स्वामी के रुप मे प्रेम, सेवा व आज्ञा पालन करता है। पश्चाताप के बाद वह पाप से फिर जाता है, पाप से घृणा करता है तथा मसीह में नए जीवन की शक्ति से पाप पर जय पाता है।

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